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शराब Sher
13 sher
तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचोतुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है

हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली हैडाका तो नहीं मारा चोरी तो नहीं की है

'मीर' उन नीम-बाज़ आँखों मेंसारी मस्ती शराब की सी है

ऐ 'ज़ौक़' देख दुख़्तर-ए-रज़ को न मुँह लगाछुटती नहीं है मुँह से ये काफ़र लगी हुई

बे पिए ही शराब से नफ़रतये जहालत नहीं तो फिर क्या है

तर्क-ए-मय ही समझ इसे नासेहइतनी पी है कि पी नहीं जाती

कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा 'ग़ालिब' और कहाँ वाइज़पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले

ये मसाइल-ए-तसव्वुफ़ ये तिरा बयान 'ग़ालिब'तुझे हम वली समझते जो न बादा-ख़्वार होता

शिकस्त-ए-तौबा की तम्हीद है तिरी तौबाज़बाँ पे तौबा 'मुबारक' निगाह साग़र पर

पिला मय आश्कारा हम को किस की साक़िया चोरीख़ुदा से जब नहीं चोरी तो फिर बंदे से क्या चोरी

पी शौक़ से वाइज़ अरे क्या बात है डर कीदोज़ख़ तिरे क़ब्ज़े में है जन्नत तिरे घर की

बे-पिए शैख़ फ़रिश्ता था मगरपी के इंसान हुआ जाता है

ऐ 'ज़ौक़' देख दुख़्तर-ए-रज़ को न मुँह लगाछुटती नहीं है मुँह से ये काफ़िर लगी हुई
