Couplets · शेर

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शराब Sher

13 sher

तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचोतुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है

मुनव्वर राना

हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली हैडाका तो नहीं मारा चोरी तो नहीं की है

अकबर इलाहाबादी

'मीर' उन नीम-बाज़ आँखों मेंसारी मस्ती शराब की सी है

मीर तक़ी मीर

ऐ 'ज़ौक़' देख दुख़्तर-ए-रज़ को न मुँह लगाछुटती नहीं है मुँह से ये काफ़र लगी हुई

शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

बे पिए ही शराब से नफ़रतये जहालत नहीं तो फिर क्या है

Sahir Ludhianvi

तर्क-ए-मय ही समझ इसे नासेहइतनी पी है कि पी नहीं जाती

Shakeel Badayuni

कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा 'ग़ालिब' और कहाँ वाइज़पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले

मिर्ज़ा ग़ालिब

ये मसाइल-ए-तसव्वुफ़ ये तिरा बयान 'ग़ालिब'तुझे हम वली समझते जो न बादा-ख़्वार होता

मिर्ज़ा ग़ालिब

शिकस्त-ए-तौबा की तम्हीद है तिरी तौबाज़बाँ पे तौबा 'मुबारक' निगाह साग़र पर

मुबारक अज़ीमाबादी

पिला मय आश्कारा हम को किस की साक़िया चोरीख़ुदा से जब नहीं चोरी तो फिर बंदे से क्या चोरी

शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

पी शौक़ से वाइज़ अरे क्या बात है डर कीदोज़ख़ तिरे क़ब्ज़े में है जन्नत तिरे घर की

Shakeel Badayuni

बे-पिए शैख़ फ़रिश्ता था मगरपी के इंसान हुआ जाता है

Shakeel Badayuni

ऐ 'ज़ौक़' देख दुख़्तर-ए-रज़ को न मुँह लगाछुटती नहीं है मुँह से ये काफ़िर लगी हुई

शेख़ इब्राहीम ज़ौक़