“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोन जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
“अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करोतुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो
“उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलोधड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है
“वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगामसअला फूल का है फूल किधर जाएगा
“ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आयाजाने क्यूँ आज तिरे नाम पे रोना आया
“तुम को आता है प्यार पर ग़ुस्सामुझ को ग़ुस्से पे प्यार आता है
“लोग कहते हैं मोहब्बत में असर होता हैकौन से शहर में होता है किधर होता है
“पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने हैजाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है
“हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनामवो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता
“चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद हैहम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है
“ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजेइक आग का दरिया है और डूब के जाना है
“न जी भर के देखा न कुछ बात कीबड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
“हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन कोक्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया
“मरज़-ए-इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहेन दवा याद रहे और न दुआ याद रहे
“सितारों से आगे जहाँ और भी हैंअभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं
“कुछ तुम्हारी निगाह काफ़िर थीकुछ मुझे भी ख़राब होना था
“कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगीयूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता
“तेरा मिलना ख़ुशी की बात सहीतुझ से मिल कर उदास रहता हूँ
“इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दियावर्ना हम भी आदमी थे काम के
“उम्र सारी तो कटी इश्क़-ए-बुताँ में 'मोमिन'आख़िरी वक़्त में क्या ख़ाक मुसलमाँ होंगे
“उन का ज़िक्र उन की तमन्ना उन की यादवक़्त कितना क़ीमती है आज कल
“इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्याआगे आगे देखिए होता है क्या
“दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैंकितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं
“मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न देमैं हूँ दर्द-ए-इश्क़ से जाँ-ब-लब मुझे ज़िंदगी की दुआ न दे