Couplets · शेर

Every Sher, In One Place

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इश्क़ Sher

81 sher

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोन जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए

बशीर बद्र

अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करोतुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो

मुनव्वर राना

उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलोधड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है

Rahat Indori

वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगामसअला फूल का है फूल किधर जाएगा

Parveen Shakir

ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आयाजाने क्यूँ आज तिरे नाम पे रोना आया

Shakeel Badayuni

तुम को आता है प्यार पर ग़ुस्सामुझ को ग़ुस्से पे प्यार आता है

अमीर मीनाई

लोग कहते हैं मोहब्बत में असर होता हैकौन से शहर में होता है किधर होता है

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने हैजाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है

मीर तक़ी मीर

हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनामवो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता

अकबर इलाहाबादी

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद हैहम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है

हसरत मोहानी

ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजेइक आग का दरिया है और डूब के जाना है

जिगर मुरादाबादी

न जी भर के देखा न कुछ बात कीबड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की

बशीर बद्र

हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन कोक्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया

Sahir Ludhianvi

मरज़-ए-इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहेन दवा याद रहे और न दुआ याद रहे

शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

सितारों से आगे जहाँ और भी हैंअभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं

अल्लामा इक़बाल

कुछ तुम्हारी निगाह काफ़िर थीकुछ मुझे भी ख़राब होना था

मजाज़ लखनवी

कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगीयूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता

बशीर बद्र

तेरा मिलना ख़ुशी की बात सहीतुझ से मिल कर उदास रहता हूँ

Sahir Ludhianvi

इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दियावर्ना हम भी आदमी थे काम के

मिर्ज़ा ग़ालिब

उम्र सारी तो कटी इश्क़-ए-बुताँ में 'मोमिन'आख़िरी वक़्त में क्या ख़ाक मुसलमाँ होंगे

मोमिन ख़ाँ मोमिन

उन का ज़िक्र उन की तमन्ना उन की यादवक़्त कितना क़ीमती है आज कल

Shakeel Badayuni

इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्याआगे आगे देखिए होता है क्या

मीर तक़ी मीर

दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैंकितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं

जिगर मुरादाबादी

मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न देमैं हूँ दर्द-ए-इश्क़ से जाँ-ब-लब मुझे ज़िंदगी की दुआ न दे

Shakeel Badayuni