तोष, poet
Sootradhar · Author

तोष

तोष

श्रृंगवेरपुर, इलाहबाद, उत्तर प्रदेश

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Selected Quotes

बिछुरे मग जाती सँघाती मिली चख चाति कै धार सवाती मिली ।रसना जड़ की सरसाती मिली चित सूम को सोन की थाती मिली ।
— तोष
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सरकै अँग अँग अबै गति सी मिसि की रिसकी सिसकी भरती ।करि हूँ हूँ हहा हमसो हरिसो कै कका की सोँ मो करको धरती ।
— तोष
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Poetry & Stories

  1. गोपिन के अँसुवान के नीर - तोष

    गोपिन के अँसुवान के नीर पनारे बहे बहिकै भए नारे ।नारे भए ते भई नदियाँ नदियाँ नद ह्वै गए काटि कगारे ।

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  2. बिछुरे मग जाती सँघाती - तोष

    बिछुरे मग जाती सँघाती मिली चख चाति कै धार सवाती मिली ।रसना जड़ की सरसाती मिली चित सूम को सोन की थाती मिली ।

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  3. सरकै अँग अँग अबै गति सी - तोष

    सरकै अँग अँग अबै गति सी मिसि की रिसकी सिसकी भरती ।करि हूँ हूँ हहा हमसो हरिसो कै कका की सोँ मो करको धरती ।

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  4. तेरियै चित्र के काज हमै करि - तोष

    तेरियै चित्र के काज हमै करि तोष सबै ब्रजराज दये हैँ ।पत्र बिचित्र बिचित्र बनाइ सिखाइ सबै बहु मोद मये हैँ ।

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  5. कैसे कहौँ कोक वे तो शोक ही मे रहेँ निशि - तोष

    कैसे कहौँ कोक वे तो शोक ही मे रहेँ निशि ,ये तो शशिमुखी सदा आनँद सोँ हेरे हैँ ।

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