Selected Quotes
Poetry & Stories
जौँ लौँ कोऊ पारखी सोँ होन नहिँ पाई भेँट - ठाकुर
जौँ लौँ कोऊ पारखी सोँ होन नहिँ पाई भेँटतब ही लौँ तनक गरीब सोँ सरीरा हैँ ।
बैर प्रीति करिबे की मन में न राखै सँक - ठाकुर
बैर प्रीति करिबे की मन में न राखै सक॥राजा राव देखि कै न छाती धक धाकरी।
हिलि मिलि लीजिये प्रवीनन ते आठो याम - ठाकुर
हिलि मिलि लीजिये प्रवीनन ते आठो यामकीजिये अराम जासोँ जिय को अराम है ।
सेवक सिपाही सदा उन रजपूतन के - ठाकुर
सेवक सिपाही सदा उन रजपूतन केदान युद्ध वीरता मेँ नेकु जे न मुरके ।
चारहू ओर उदै मुखचँद की चाँदनी चारु निहार ले री - ठाकुर
चारहू ओर उदै मुखचँद की चाँदनी चारु निहार ले री ।बलि जो पै अधीन भयो पिय प्यारो तो एतो बिचार बिचारि ले री ।
ठाकुर: Quick Answers
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Kavishala has 25 poems and stories by ठाकुर, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by ठाकुर
जौँ लौँ कोऊ पारखी सोँ होन नहिँ पाई भेँट - ठाकुर
जौँ लौँ कोऊ पारखी सोँ होन नहिँ पाई भेँटतब ही लौँ तनक गरीब सोँ सरीरा हैँ ।
बैर प्रीति करिबे की मन में न राखै सँक - ठाकुर
बैर प्रीति करिबे की मन में न राखै सक॥राजा राव देखि कै न छाती धक धाकरी।
हिलि मिलि लीजिये प्रवीनन ते आठो याम - ठाकुर
हिलि मिलि लीजिये प्रवीनन ते आठो यामकीजिये अराम जासोँ जिय को अराम है ।
सेवक सिपाही सदा उन रजपूतन के - ठाकुर
सेवक सिपाही सदा उन रजपूतन केदान युद्ध वीरता मेँ नेकु जे न मुरके ।
चारहू ओर उदै मुखचँद की चाँदनी चारु निहार ले री - ठाकुर
चारहू ओर उदै मुखचँद की चाँदनी चारु निहार ले री ।बलि जो पै अधीन भयो पिय प्यारो तो एतो बिचार बिचारि ले री ।
यह प्रेम कथा कहिये किहि सोँ जो कहै तो कहा कोऊ मानत है - ठाकुर
यह प्रेम कथा कहिये किहि सोँ जो कहै तो कहा कोऊ मानत है ।सब ऊपरी धीर धरायो चहै तन रोग नहीँ पहिचानत है ।
अब का समुझावती को समुझै बदनामी के बीज तो बो चुकी री - ठाकुर
अब का समुझावती को समुझै बदनामी के बीज तो बो चुकी री ।तब तौ इतनौ न बिचार कयो इहिँ जाल परे कहु को चुकी री ।
वा निरमोहिनि रूप की रासि न ऊपर के मन आनति ह्वै है - ठाकुर
वा निरमोहिनि रूप की रासि न ऊपर के मन आनति ह्वै है ।बारहि बार बिलोकि घरी घरी सूरति तो पहिचानति ह्वै है ।
रूप अनूप दई बिधि तोहि तो मान किये न सयानि कहावै - ठाकुर
रूप अनूप दई बिधि तोहि तो मान किये न सयानि कहावै ।और सुनो यह रूप जवाहिर भाग बड़े विरलो कोई पावै ।
धनि हैँगे वे तात औ मात जयो जिन देह धरी सो घरी धनि हैं - ठाकुर
धनि हैँगे वे तात औ मात जयो जिन देह धरी सो घरी धनि हैँ ।धनि हैँ दृग जेऊ तुम्हैँ दरसैँ परसैँ कर तेऊ बड़े धनि हैँ ।
दस बार, बीस बार, बरजि दई है जाहि - ठाकुर
दस बार, बीस बार, बरजि दई है जाहि,एते पै न मानै जो तौ, जरन बरन देव।
मेवा घनी बई काबुल में - ठाकुर
मेवा घनी बई काबुल में, बिंदराबन आनि करील लगाएराधिका सी सुरबाम बिहाइ कै, कूबरी संग सनेह रचाए।
Selected Quotes by ठाकुर (चुनिंदा उद्धरण)
जौँ लौँ कोऊ पारखी सोँ होन नहिँ पाई भेँटतब ही लौँ तनक गरीब सोँ सरीरा हैँ ।बैर प्रीति करिबे की मन में न राखै सक॥राजा राव देखि कै न छाती धक धाकरी।हिलि मिलि लीजिये प्रवीनन ते आठो यामकीजिये अराम जासोँ जिय को अराम है ।सेवक सिपाही सदा उन रजपूतन केदान युद्ध वीरता मेँ नेकु जे न मुरके ।चारहू ओर उदै मुखचँद की चाँदनी चारु निहार ले री ।बलि जो पै अधीन भयो पिय प्यारो तो एतो बिचार बिचारि ले री ।यह प्रेम कथा कहिये किहि सोँ जो कहै तो कहा कोऊ मानत है ।सब ऊपरी धीर धरायो चहै तन रोग नहीँ पहिचानत है ।Videos on ठाकुर
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