राजा भरत ने अपने राज्य की प्रगति की सालाना रिपोर्ट पढ़ते हुए कहा-“जैसा कि हमारा लक्ष्य था कि इस देश में दूध और दही की नदियां बहने लगे, वह चालू वर्ष में पूरा हो गया और आपने देखा होगा कि दूध और दही की नदियां बह रही थीं। पर इसी बीच देश को एक भारी विपत्ति का सामना करना पड़ा कि दूध और दही की ये नदियां किसी टेक्नीकल गलती के परिणामस्वरूप आगे जाकर परस्पर मिल गईं। नतीजा यह हुआ कि दही में मिलने से दूध की नदी भी जम गई और फट जाने के कारण दूध पीने लायक नहीं रहा। अब हमारे सामने समस्या है कि इस सड़े दही को, जिसकी दुर्गंध के कारण जनता को बड़ा कष्ट हो रहा है, किस प्रकार साफ करवाया जाए। हमने इस कार्य के लिए विदेश से मदद मांगी है…।”








