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सैफ़ी आज़मी: Quick Answers
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Selected Quotes by सैफ़ी आज़मी (चुनिंदा उद्धरण)
काश इतना ही समझ लेते ये अहल-ए-कारवाँ फ़ासले बढ़ जाते हैं सहमी हुई रफ़्तार सेआँख नम रुख़ पर उदासी दर्द भी दिल के क़रीब क्या मोहब्बत आ गई है अपनी मंज़िल के क़रीबहर लफ़्ज़-ए-आरज़ू में झलक उन की आ गई उन को निकालता ही रहा दास्ताँ से मैंख़ुशी से फूलें न अहल-ए-सहरा अभी कहाँ से बहार आई अभी तो पहुँचा है आबलों तक मिरा मज़ाक़-ए-बरहना-पाईCouplets (Sher) by सैफ़ी आज़मी
काश इतना ही समझ लेते ये अहल-ए-कारवाँ फ़ासले बढ़ जाते हैं सहमी हुई रफ़्तार सेआँख नम रुख़ पर उदासी दर्द भी दिल के क़रीब क्या मोहब्बत आ गई है अपनी मंज़िल के क़रीबहर लफ़्ज़-ए-आरज़ू में झलक उन की आ गई उन को निकालता ही रहा दास्ताँ से मैंख़ुशी से फूलें न अहल-ए-सहरा अभी कहाँ से बहार आई अभी तो पहुँचा है आबलों तक मिरा मज़ाक़-ए-बरहना-पाई
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