चोट - ओमप्रकाश वाल्‍मीकि

ओमप्रकाश वाल्‍मीकिओमप्रकाश वाल्‍मीकि30 Sept 1950 – 17 Sept 2013

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पथरीली चट्टान पर
हथौड़े की चोट
चिंगारी को जन्‍म देती है
जो गाहे-बगाहे आग बन जाती है
.
आग में तपकर
लोहा नर्म पड़ जाता है
ढल जाता है
मनचाहे आकार में
हथौड़े की चोट में ।

एक तुम हो,
जिस पर किसी चोट का
असर नहीं होता ।

(फ़रवरी, 1985)
ओमप्रकाश वाल्‍मीकि
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ओमप्रकाश वाल्‍मीकि

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