वीणावादिनि वर दे

NiaralaNiarala21 Feb 1896

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वर दे, वीणावादिनि वर दे !
प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव
भारत में भर दे !

काट अंध-उर के बंधन-स्तर
बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;
कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर
जगमग जग कर दे !

नव गति, नव लय, ताल-छंद नव
नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;
नव नभ के नव विहग-वृंद को
नव पर, नव स्वर दे !

वर दे, वीणावादिनि वर दे।

Niarala
About the poet

Niarala

Suryakant Tripathi, known by his Pet Name Nirala, was a poet, novelist, essayist and story-writer. He also drew many sketches.

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