बेचैन चील!!
उस जैसा मैं पर्यटनशील
प्यासा-प्यासा,
देखता रहूँगा एक दमकती हुई झील
या पानी का कोरा झाँसा
जिसकी सफ़ेद चिलचिलाहटों में है अजीब
इनकार एक सूना!!
बेचैन चील!!
उस जैसा मैं पर्यटनशील
प्यासा-प्यासा,
देखता रहूँगा एक दमकती हुई झील
या पानी का कोरा झाँसा
जिसकी सफ़ेद चिलचिलाहटों में है अजीब
इनकार एक सूना!!

Gajanan Madhav Muktibodh (13 November 1917 – 11 September 1964)[1] was one of the most prominent Hindi poets, essayist, literary and political critic, and fiction writers of the 20th century.[2] He also remained assistant-editor of journals like, Naya Khun an…
View profile & all 34 Poems / Storiesघोर धनुर्धर, बाण तुम्हारा सब प्राणों को पार करेगातेरी प्रत्यंचा का कम्पन सूनेपन का भार हरेगा
मुझे नहीं मालूममेरी प्रतिक्रियाएँ
जब दुपहरी ज़िन्दगी पर रोज़ सूरजएक जॉबर-सा
दिमाग़ी गुहान्धकार का ओरांग उटांगस्वप्न के भीतर स्वप्न,
घोर धनुर्धर, बाण तुम्हारा सब प्राणों को पार करेगा,तेरी प्रत्यंचा का कंपन सूनेपन का भार हरेगा