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मिस्दाक़ आज़मी: Quick Answers
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Selected Quotes by मिस्दाक़ आज़मी (चुनिंदा उद्धरण)
फ़क़त मिलना-मिलाना कम हुआ है हमारी दोस्ती टूटी नहीं हैइक तबस्सुम का भरम आबाद होंटों पर किए जी रहे हैं लोग अपनी अपनी वीरानी के साथऐ मिरे मूनिस ओ ग़म-ख़्वार मुझे मरने दे बात अब हुक्म की तामील तक आ पहुँची हैख़ुशनुमा मंज़र भी सब धुंधले नज़र आते हैं यार जब दिलों में भी उतर जाती है सहराओं की ख़ाकग़ार वालों की तरह निकला है वो कमरे से आज उस को इस दुनिया की तब्दीली का अंदाज़ा नहींCouplets (Sher) by मिस्दाक़ आज़मी
फ़क़त मिलना-मिलाना कम हुआ है हमारी दोस्ती टूटी नहीं हैइक तबस्सुम का भरम आबाद होंटों पर किए जी रहे हैं लोग अपनी अपनी वीरानी के साथऐ मिरे मूनिस ओ ग़म-ख़्वार मुझे मरने दे बात अब हुक्म की तामील तक आ पहुँची हैख़ुशनुमा मंज़र भी सब धुंधले नज़र आते हैं यार जब दिलों में भी उतर जाती है सहराओं की ख़ाकग़ार वालों की तरह निकला है वो कमरे से आज उस को इस दुनिया की तब्दीली का अंदाज़ा नहीं
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