दुश्मन की दोस्ती है अब

Majrooh SultanpuriMajrooh Sultanpuri1 Oct 1919 – 24 May 2000

1 min read · 12.9K reads

दुश्मन की दोस्ती है अब अहले वतन के साथ
है अब खिजाँ चमन मे नए पैराहन के साथ

सर पर हवाए ज़ुल्म चले सौ जतन के साथ
अपनी कुलाह कज है उसी बाँकपन के साथ

किसने कहा कि टूट गया खंज़रे फिरंग
सीने पे ज़ख़्मे नौ भी है दाग़े कुहन के साथ

झोंके जो लग रहे हैं नसीमे बहार के
जुम्बिश में है कफ़स भी असीरे चमन के साथ

मजरूह काफ़ले कि मेरे दास्ताँ ये है
रहबर ने मिल के लूट लिया राहजन के साथ

Majrooh Sultanpuri
About the poet

Majrooh Sultanpuri

Asrar ul Hassan Khan (1 October 1919 − 24 May 2000), better known as Majrooh Sultanpuri, was an Indian Urdu poet. He is known for his work as an Urdu poet, and as a lyricist and songwriter in the Bollywood film industry, where he wrote Hindustani lyrics for n…

View profile & all 14 Poems / Stories

More from Majrooh Sultanpuri

  1. मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर

    मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगरलोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया

    42.3K reads
  2. हम हैं मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार की तरह

    हम हैं मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार की तरहउठती है हर निगाह ख़रीदार की तरह

    12.8K reads
  3. जब हुआ इरफ़ाँ तो ग़म आराम-ए-जाँ बनता गया

    जब हुआ इरफ़ाँ तो ग़म आराम-ए-जाँ बनता गयासोज़-ए-जानाँ दिल में सोज़-ए-दीगराँ बनता गया

    12.7K reads
  4. हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो हम थे परेशाँ तुम से ज़ियादा

    हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो हम थे परेशाँ तुम से ज़ियादाचाक किए हैं हम ने अज़ीज़ो चार गरेबाँ तुम से ज़ियादा

    12.7K reads
  5. मुझे सहल हो गईं मंजिलें

    मुझे सहल हो गईं मंजिलें वो हवा के रुख भी बदल गये ।तिरा हाथ हाथ में आ गया कि चिराग राह में जल गये ।

    12.8K reads

More Poetry & Stories You May Like