तिरे दर से उठ कर जिधर जाऊँ मैं

Khumar BarabankviKhumar Barabankvi15 Sept 1919 – 19 Feb 1999

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तिरे दर से उठ कर जिधर जाऊँ मैं

चलूँ दो क़दम और ठहर जाऊँ मैं

सँभाले तो हूँ ख़ुद को तुझ बिन मगर

जो छू ले कोई तो बिखर जाऊँ मैं

अगर तू ख़फ़ा हो तो पर्वा नहीं

तिरा ग़म ख़फ़ा हो तो मर जाऊँ मैं

तबस्सुम ने इतना डसा है मुझे

कली मुस्कुराए तो डर जाऊँ मैं

मिरा घर फ़सादात में जल चुका

वतन जाऊँ तो किस के घर जाऊँ मैं

'ख़ुमार' उन से तर्क-ए-तअ'ल्लुक़ बजा

मगर जीते-जी कैसे मर जाऊँ मैं

Khumar Barabankvi
About the poet

Khumar Barabankvi

Khumār Barabankvi Urdu: خُمار بارہ بنکوی‎ (15 September 1919 – 19 February 1999) was an Urdu poet and lyricist from Barabanki, Uttar Pradesh, India. His real name was Mohammed Haidar Khan, The word comes from the Arabic root 'Khum' which means a jar of wine.…

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