ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं

Jaun Eliyaजौन एलिया14 Dec 1931 – 8 Nov 2002

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ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं
शुक्रिया मश्वरत का चलते हैं

हो रहा हूँ मैं किस तरह बरबाद
देखने वाले हाथ मलते हैं

है वो जान अब हर एक महफ़िल की
हम भी अब घर से कम निकलते हैं

क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में
जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं

है उसे दूर का सफ़र दर-पेश
हम सँभाले नहीं सँभलते हैं

तुम बनो रंग तुम बनो ख़ुश्बू
हम तो अपने सुख़न में ढलते हैं

मैं उसी तरह तो बहलता हूँ
और सब जिस तरह बहलते हैं

है अजब फ़ैसले का सहरा भी
चल न पड़िए तो पाँव जलते हैं

Jaun Eliya
About the poet

Jaun Eliya जौन एलिया

Syed Hussain Jaun Asghar Naqvi,commonly known as Jaun Elia (14 December 1931 – 8 November 2002), was an Urdu poet, philosopher, biographer, and scholar from South Asia who migrated from independent India to Pakistan. He was the brother of Rais Amrohvi and Sye…

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