About Jaun Eliya
Syed Hussain Jaun Asghar Naqvi,commonly known as Jaun Elia (14 December 1931 – 8 November 2002), was an Urdu poet, philosopher, biographer, and scholar from South Asia who migrated from independent India to Pakistan. He was the brother of Rais Amrohvi and Syed Muhammad Taqi, who were journalists and psychoanalysts. He…
Selected Quotes
Poetry & Stories
उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्या
उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्यादाग़ ही देंगे मुझ को दान में क्या
नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम
नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हमबिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हम
बे-क़रारी सी बे-क़रारी है
बे-क़रारी सी बे-क़रारी हैवस्ल है और फ़िराक़ तारी है
कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे
कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगेजाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
हालत-ए-हाल के सबब हालत-ए-हाल ही गई
हालत-ए-हाल के सबब हालत-ए-हाल ही गईशौक़ में कुछ नहीं गया शौक़ की ज़िंदगी गई
About Jaun Eliya
Syed Hussain Jaun Asghar Naqvi,commonly known as Jaun Elia (14 December 1931 – 8 November 2002), was an Urdu poet, philosopher, biographer, and scholar from South Asia who migrated from independent India to Pakistan. He was the brother of Rais Amrohvi and Syed Muhammad Taqi, who were journalists and psychoanalysts. He was fluent in Urdu, Arabic, English, Persian, Sanskrit and Hebrew. One of the most prominent modern Urdu poets, popular for his unconventional ways, he "acquired knowledge of philosophy, logic, Islamic history, the Muslim Sufi tradition, Muslim religious sciences, Western literature, and Kabbala."
जॉन एलिया उर्दू के एक महान शायर हैं। इनका जन्म 14 दिसंबर 1931 को अमरोहा में हुआ। यह अब के शायरों में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले शायरों में शुमार हैं। शायद, यानी,गुमान इनके प्रमुख संग्रह हैं इनकी मृत्यु 8 नवंबर 2002 में हुई।जॉन एलिया का जन्म 14 दिसंबर 1931 को उत्तर प्रदेश के अमरोहा में एक प्रमुख परिवार में हुआ था। वह अपने भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उनके पिता अल्लामा शफ़ीक़ हसन एलियाह एक खगोलशास्त्री और कवि होने के अलावा कला और साहित्य से भी गहरे जुड़े थे। इस सीखने के माहौल ने उसी तर्ज पर जून की प्रकृति को आकार दिया। उन्होंने अपनी पहली उर्दू कविता महज 8 साल की उम्र में लिखी थी।जौन सिर्फ पाकिस्तान में ही नहीं हिंदुस्तान व पूरे विश्व में अदब के साथ पढ़े और जाने जाते हैं।
Jaun Eliya: Quick Answers
Who is Jaun Eliya?
Syed Hussain Jaun Asghar Naqvi,commonly known as Jaun Elia (14 December 1931 – 8 November 2002), was an Urdu poet, philosopher, biographer, and scholar from South Asia who migrated from independent India to Pakistan. He was the brother of Rais Amrohvi and Syed Muhammad Taqi, who were journalists and psychoanalysts.
When was Jaun Eliya born?
Jaun Eliya was born on 14 December 1931.
When did Jaun Eliya die?
Jaun Eliya passed away on 8 November 2002.
Where can I read Jaun Eliya's poetry?
Kavishala has 26 poems and stories by Jaun Eliya, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Jaun Eliya
उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्या
उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्यादाग़ ही देंगे मुझ को दान में क्या
नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम
नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हमबिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हम
बे-क़रारी सी बे-क़रारी है
बे-क़रारी सी बे-क़रारी हैवस्ल है और फ़िराक़ तारी है
कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे
कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगेजाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
हालत-ए-हाल के सबब हालत-ए-हाल ही गई
हालत-ए-हाल के सबब हालत-ए-हाल ही गईशौक़ में कुछ नहीं गया शौक़ की ज़िंदगी गई
बे-दिली क्या यूँही दिन गुज़र जाएँगे
बे-दिली क्या यूँही दिन गुज़र जाएँगेसिर्फ़ ज़िंदा रहे हम तो मर जाएँगे
अपने सब यार काम कर रहे हैं
अपने सब यार काम कर रहे हैंऔर हम हैं कि नाम कर रहे हैं
गाहे गाहे बस अब यही हो क्या
गाहे गाहे बस अब यही हो क्यातुम से मिल कर बहुत ख़ुशी हो क्या
ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं
ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैंशुक्रिया मश्वरत का चलते हैं
इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं
इक हुनर है जो कर गया हूँ मैंसब के दिल से उतर गया हूँ मैं
सर ही अब फोड़िए नदामत में
सर ही अब फोड़िए नदामत मेंनींद आने लगी है फ़ुर्क़त में
बहुत दिल को कुशादा कर लिया क्या
बहुत दिल को कुशादा कर लिया क्याज़माने भर से वा'दा कर लिया क्या
Selected Quotes by Jaun Eliya (चुनिंदा उद्धरण)
बे-दिली क्या यूँही दिन गुज़र जाएँगेसिर्फ़ ज़िंदा रहे हम तो मर जाएँगेउम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्यादाग़ ही देंगे मुझ को दान में क्यानया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हमबिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हमबहुत दिल को कुशादा कर लिया क्याज़माने भर से वा'दा कर लिया क्याकितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगेजाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगेइक हुनर है जो कर गया हूँ मैंसब के दिल से उतर गया हूँ मैंVideos on Jaun Eliya
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