About इफ़्तिख़ार आज़मी
मूल नाम : सय्यद इफ़्तिख़ार हुसैन जन्म : आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश निधन : 12 Mar 1977 सय्यद इफ़्तेख़ार हुसैन इफ़्तेख़ार आज़मी की गिनती प्रसिद्ध प्रगतिवादी शाइरों में होती है लेकिन उन्होंने प्रगतिवादी विचारधारा के दबाव को अपनी शाइरी और रचनात्मक अनुभवों पर हावी नहीं होने दिया. इफ़्तेख़ार आज़मी की पैदाइश 1935 में इमलीपुर आज़मगढ़ में हुई.…
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About इफ़्तिख़ार आज़मी
मूल नाम : सय्यद इफ़्तिख़ार हुसैन
जन्म :आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश
निधन : 12 Mar 1977
सय्यद इफ़्तेख़ार हुसैन इफ़्तेख़ार आज़मी की गिनती प्रसिद्ध प्रगतिवादी शाइरों में होती है लेकिन उन्होंने प्रगतिवादी विचारधारा के दबाव को अपनी शाइरी और रचनात्मक अनुभवों पर हावी नहीं होने दिया.
इफ़्तेख़ार आज़मी की पैदाइश 1935 में इमलीपुर आज़मगढ़ में हुई. उनका खानदान मज़हबी परम्पराओ व विचारधाराओं के मानने वाले थे,उनके पिता मौलाना सय्यद अब्दुल हमीद मुंबई के मस्जिद में पेश इमाम थे लेकिन उनकी शख्सियत पर उस माहौल का असर नहीं पड़ा,वह अपनी ज़िन्दगी और शाइरी में मार्क्सवादी विचारधारा को जीते रहे. इफ़्तेख़ार आज़मी ने आरंभ में कैफ़ी आज़मी से अशुद्धियाँ ठीक कराई जो उनके हमवतन होने के साथ साथ उनके नज़दीकी दोस्त भी थे. उनका काव्य संग्रह ‘कुंन’ के नाम से प्रकाशित हुआ. दूसरा संग्रह ‘अनकही’ के नाम से संकलित किया लेकिन 12 मार्च 1977 को वह इस दुनिया से कूच कर गये और यह संग्रह उनकी ज़िन्दगी में प्रकाशित न हो सका.
इफ़्तिख़ार आज़मी: Quick Answers
Who is इफ़्तिख़ार आज़मी?
मूल नाम : सय्यद इफ़्तिख़ार हुसैन जन्म : आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश निधन : 12 Mar 1977 सय्यद इफ़्तेख़ार हुसैन इफ़्तेख़ार आज़मी की गिनती प्रसिद्ध प्रगतिवादी शाइरों में होती है लेकिन उन्होंने प्रगतिवादी विचारधारा के दबाव को अपनी शाइरी और रचनात्मक अनुभवों पर हावी नहीं होने दिया. इफ़्तेख़ार आज़मी की पैदाइश 1935 में इमलीपुर आज़मगढ़ में हुई.
When did इफ़्तिख़ार आज़मी die?
इफ़्तिख़ार आज़मी passed away on 12 March 1977.
Where can I read इफ़्तिख़ार आज़मी's poetry?
Kavishala has 4 couplets (sher) by इफ़्तिख़ार आज़मी, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by इफ़्तिख़ार आज़मी
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Selected Quotes by इफ़्तिख़ार आज़मी (चुनिंदा उद्धरण)
हुस्न यूँ इश्क़ से नाराज़ है अब फूल ख़ुश्बू से ख़फ़ा हो जैसेकितना सुनसान है रस्ता दिल का क़ाफ़िला कोई लुटा हो जैसेअजब तनाव है माहौल में कहें किस से कहीं पे आज कोई हादसा हुआ तो नहींशोर-ए-दरिया-ए-वफ़ा इशरत-ए-साहिल के क़रीब रुक गए अपने क़दम आए जो मंज़िल के क़रीबCouplets (Sher) by इफ़्तिख़ार आज़मी
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