About इब्न-ए-मुफ़्ती
उपनाम : 'मुफ़्ती' मूल नाम : सय्यद अयाज़ मुफ़्ती
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उपनाम : 'मुफ़्ती'
मूल नाम : सय्यद अयाज़ मुफ़्ती
इब्न-ए-मुफ़्ती: Quick Answers
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उपनाम : 'मुफ़्ती' मूल नाम : सय्यद अयाज़ मुफ़्ती
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Selected Quotes by इब्न-ए-मुफ़्ती (चुनिंदा उद्धरण)
कैसा जादू है समझ आता नहीं नींद मेरी ख़्वाब सारे आप केजिन पे नाज़ाँ थे ये ज़मीन ओ फ़लक अब कहाँ हैं वो सूरतें बाक़ीकर बुरा तो भला नहीं होता कर भला तो बुरा नहीं होताहम ने देखा है रू-ब-रू उन के आईना आईना नहीं होताइक ज़रा सी बात पे ये मुँह बनाना रूठना इस तरह तो कोई अपनों से ख़फ़ा होता नहींतेरे ख़्वाबों की लत लगी जब से रात का इंतिज़ार रहता हैCouplets (Sher) by इब्न-ए-मुफ़्ती
कैसा जादू है समझ आता नहीं नींद मेरी ख़्वाब सारे आप केजिन पे नाज़ाँ थे ये ज़मीन ओ फ़लक अब कहाँ हैं वो सूरतें बाक़ीकर बुरा तो भला नहीं होता कर भला तो बुरा नहीं होताहम ने देखा है रू-ब-रू उन के आईना आईना नहीं होताइक ज़रा सी बात पे ये मुँह बनाना रूठना इस तरह तो कोई अपनों से ख़फ़ा होता नहींतेरे ख़्वाबों की लत लगी जब से रात का इंतिज़ार रहता हैदिल की बातों को दिल समझता है दिल की बोली अजीब बोली हैदिल में सज्दे किया करो 'मुफ़्ती' इस में पर्वरदिगार रहता हैयूँ तो पत्थर बहुत से देखे हैं कोई तुम सा नज़र नहीं आयाअब तो कर डालिए वफ़ा उस को वो जो वादा उधार रहता हैहम से शायद मो'तबर ठहरी सबा जिस ने ये गेसू सँवारे आप केफिर से वो लौट कर नहीं आया फिर दुआ में असर नहीं आयायाद का क्या है आ गई फिर से आँख का क्या है फिर से रो ली हैये कारोबार भी कब रास आया ख़सारे में रहे हम प्यार कर केसब निशाने अगर सहीह होते तीर कोई ख़ता नहीं होता
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