अच्छा है पर कभी-कभी

हुल्लड़ मुरादाबादीहुल्लड़ मुरादाबादी29 Sept 1942 – 12 Sept 2014

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बहरों को फ़रियाद सुनाना, अच्छा है पर कभी-कभी

अंधों को दर्पण दिखलाना, अच्छा है पर कभी-कभी

ऐसा न हो तेरी कोई, उँगली ग़ायब हो जाए

नेताओं से हाथ मिलाना, अच्छा है पर कभी-कभी

बीवी को बंदूक़ सिखाकर तुमने रिस्की काम किया

अपनी लुटिया आप डुबाना, अच्छा है पर कभी-कभी

हाथ देखकर पहलवान का, अपना सिर फुड़वा बैठे

पामिस्ट्री में सच बतलाना, अच्छा है पर कभी-कभी

तुम रूहानी शे'र पढ़ोगे, पब्लिक सब भग जाएगी

भैंस के आगे बीन बजाना, अच्छा है पर कभी-कभी

घूँसे-लात चले आपस में, संयोजक का सिर फूटा

कवियों को दारू पिलवाना, अच्छा है पर कभी-कभी

पच्चीस डॉलर जुर्माने के पीक थूकने में ख़र्चे

वाशिंगटन में पान चबाना, अच्छा है पर कभी-कभी

हुल्लड़ मुरादाबादी
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हुल्लड़ मुरादाबादी

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