तुम एक सुन्दर
बियावान जंगल हो
जिसके ख़ूब भीतर
रहना चाहता हूँ मैं..
एक आदिम मनुष्य की तरह
नग्न..
भग्न..
अकेला..
बियावान जंगल हो
जिसके ख़ूब भीतर
रहना चाहता हूँ मैं..
एक आदिम मनुष्य की तरह
नग्न..
भग्न..
अकेला..

तवांग के ख़ूबसूरत पहाड़ों से उपजते हुए...सामने पहाड़ दिनभर
तवांग के ख़ूबसूरत पहाड़ों से उपजते हुए...आगे - पीछे
तवांग के ख़ूबसूरत पहाड़ों से उपजते हुए...वो आसमान जिसने
कभी कभी बहुत याद आती हैइतनी ज़्यादा याद आती है
जबकि पूरी दुनिया की जवान लड़कियोंकी आँखों में