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अर्थ है मूल भली तुक डार - दीन
अर्थ है मूल भली तुक डार सुखच्छर पत्र को पेखिकै जीजै।छन्द है फूल नवोरस हैँ फल दान के वारि सोँ सीँचिबो कीजै।
हिंदु कहें सो हम बडे - दीन
हिंदु कहें सो हम बडे, मुसलमान कहें हम्म।एक मूंग दो फाडा हैं, कुण ज्यादा कुण कम्म॥
जितना दीखै थिर नहीं - दीन
जितना दीखै थिर नहीं, थिर है निरंजन नाम।ठाठ बाट नर थिर नहीं, नाहीं थिर धन धाम॥
दीन: Quick Answers
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Poems & Stories by दीन
अर्थ है मूल भली तुक डार - दीन
अर्थ है मूल भली तुक डार सुखच्छर पत्र को पेखिकै जीजै।छन्द है फूल नवोरस हैँ फल दान के वारि सोँ सीँचिबो कीजै।
हिंदु कहें सो हम बडे - दीन
हिंदु कहें सो हम बडे, मुसलमान कहें हम्म।एक मूंग दो फाडा हैं, कुण ज्यादा कुण कम्म॥
जितना दीखै थिर नहीं - दीन
जितना दीखै थिर नहीं, थिर है निरंजन नाम।ठाठ बाट नर थिर नहीं, नाहीं थिर धन धाम॥
Selected Quotes by दीन (चुनिंदा उद्धरण)
अर्थ है मूल भली तुक डार सुखच्छर पत्र को पेखिकै जीजै।छन्द है फूल नवोरस हैँ फल दान के वारि सोँ सीँचिबो कीजै।हिंदु कहें सो हम बडे, मुसलमान कहें हम्म।एक मूंग दो फाडा हैं, कुण ज्यादा कुण कम्म॥जितना दीखै थिर नहीं, थिर है निरंजन नाम।ठाठ बाट नर थिर नहीं, नाहीं थिर धन धाम॥Videos on दीन
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