देव, poet
Sootradhar · Author

देव

देव

कुसमरा, इटावा, उत्तर प्रदेश

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Selected Quotes

आँगन बैठी सुन्यो पिय आवन चित झरोखन मे लख्यो परै ।देवजू घूँघट के पट हू मे समात न फूल्यो हियो फरक्यो परै ।
— देव
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आई बरसाने ते बुलाय वृषभानु सुता ,निरखि प्रभान प्रभा भानु की अथै गई ।
— देव
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Poetry & Stories

  1. आँगन बैठी सुन्यो पिय आवन चित झरोखन मे लख्यो परै - देव

    आँगन बैठी सुन्यो पिय आवन चित झरोखन मे लख्यो परै ।देवजू घूँघट के पट हू मे समात न फूल्यो हियो फरक्यो परै ।

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  2. आई बरसाने ते बुलाय वृषभानु सुता - देव

    आई बरसाने ते बुलाय वृषभानु सुता ,निरखि प्रभान प्रभा भानु की अथै गई ।

    2 min read · 12.3K reads
  3. आवन सुन्यो है मनभावन को भावती ने - देव

    आवन सुन्यो है मनभावन को भावती नेआँखिन अनँद आँसू ढरकि ढरकि उठैं ।

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  4. इन्दिरा के मन्दिर से सुंदर बदन वे - देव

    इन्दिरा के मन्दिर से सुंदर बदन वे ,मदन मूँदै बिहँसै रदन छवि छानि छानि ।

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  5. कुँजन के कोरे मनु केलिरस बोरे लाल - देव

    कुँजन के कोरे मनु केलिरस बोरे लाल ,तालनि के खोरे बाल आवति है नित को ।

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