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आँगन बैठी सुन्यो पिय आवन चित झरोखन मे लख्यो परै - देव
आँगन बैठी सुन्यो पिय आवन चित झरोखन मे लख्यो परै ।देवजू घूँघट के पट हू मे समात न फूल्यो हियो फरक्यो परै ।
आई बरसाने ते बुलाय वृषभानु सुता - देव
आई बरसाने ते बुलाय वृषभानु सुता ,निरखि प्रभान प्रभा भानु की अथै गई ।
आवन सुन्यो है मनभावन को भावती ने - देव
आवन सुन्यो है मनभावन को भावती नेआँखिन अनँद आँसू ढरकि ढरकि उठैं ।
इन्दिरा के मन्दिर से सुंदर बदन वे - देव
इन्दिरा के मन्दिर से सुंदर बदन वे ,मदन मूँदै बिहँसै रदन छवि छानि छानि ।
कुँजन के कोरे मनु केलिरस बोरे लाल - देव
कुँजन के कोरे मनु केलिरस बोरे लाल ,तालनि के खोरे बाल आवति है नित को ।
देव: Quick Answers
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Poems & Stories by देव
आँगन बैठी सुन्यो पिय आवन चित झरोखन मे लख्यो परै - देव
आँगन बैठी सुन्यो पिय आवन चित झरोखन मे लख्यो परै ।देवजू घूँघट के पट हू मे समात न फूल्यो हियो फरक्यो परै ।
आई बरसाने ते बुलाय वृषभानु सुता - देव
आई बरसाने ते बुलाय वृषभानु सुता ,निरखि प्रभान प्रभा भानु की अथै गई ।
आवन सुन्यो है मनभावन को भावती ने - देव
आवन सुन्यो है मनभावन को भावती नेआँखिन अनँद आँसू ढरकि ढरकि उठैं ।
इन्दिरा के मन्दिर से सुंदर बदन वे - देव
इन्दिरा के मन्दिर से सुंदर बदन वे ,मदन मूँदै बिहँसै रदन छवि छानि छानि ।
कुँजन के कोरे मनु केलिरस बोरे लाल - देव
कुँजन के कोरे मनु केलिरस बोरे लाल ,तालनि के खोरे बाल आवति है नित को ।
कुन्दन से अँग नवयौवन सुरँग उतै - देव
कुन्दन से अँग नवयौवन सुरँग उतै ,उरज उतँग धन्य प्यारो परसत है ।
कोऊ कहौ कुलटा कुलनि अकुलानि कहौ - देव
कोऊ कहौ कुलटा कुलनि अकुलानि कहौ ,कोऊ कहौ रँकिनि कलँकिनि कुनारी हौँ ।
खरी दुपहरी भरी हरी हरी कुंज मँजु - देव
खरी दुपहरी भरी हरी हरी कुंज मँजुदेव अलि पुंजन के गुंज हियो हरिजात ।
गोरी गरबीली उठी ऊँघत चकात गात - देव
गोरी गरबीली उठी ऊँघत चकात गात ,देव कवि नीलपट लपटी कपट सी ।
ग्रीषम प्रचंड घाम चंडकर मंडल तें - देव
ग्रीषम प्रचंड घाम चंडकर मंडल तें,घुमड्यौ है ’देव’ भूमि मंडल अखंड धार ।
घाँघरो घनेरो लाँबी लटैँ लटे लाँक पर - देव
घाँघरो घनेरो लाँबी लटैँ लटे लाँक पर ,काँकरेजी सारी खुली अधखुली टाड़ वह ।
जगमगे जोबन जराऊ तरिवन कान - देव
जगमगे जोबन जराऊ तरिवन कान ,ओँठन अनूठे रस हाँसी उमड़े परत ।
Selected Quotes by देव (चुनिंदा उद्धरण)
आँगन बैठी सुन्यो पिय आवन चित झरोखन मे लख्यो परै ।देवजू घूँघट के पट हू मे समात न फूल्यो हियो फरक्यो परै ।आई बरसाने ते बुलाय वृषभानु सुता ,निरखि प्रभान प्रभा भानु की अथै गई ।आवन सुन्यो है मनभावन को भावती नेआँखिन अनँद आँसू ढरकि ढरकि उठैं ।इन्दिरा के मन्दिर से सुंदर बदन वे ,मदन मूँदै बिहँसै रदन छवि छानि छानि ।कुँजन के कोरे मनु केलिरस बोरे लाल ,तालनि के खोरे बाल आवति है नित को ।कुन्दन से अँग नवयौवन सुरँग उतै ,उरज उतँग धन्य प्यारो परसत है ।Videos on देव
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