दास, poet
Sootradhar · Author

दास

दास

टयोंगा, प्रतापगढ, उत्तर प्रदेश

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Selected Quotes

बादि छवो रस व्यँजन खाइबो बादि नवो रस मिश्रित गाइबो ।बादि जराय प्रजँक बिछाय प्रसून धने परि पाइ लुटाइबो ।
— दास
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लेहु जु लाई हौँ गेह तिहारे परे जेहि नेह सँदेस खरे मैँ ।भेटौ भुजा भरि मेटौ बिथान समेटौजू तौ सब साध भरे मैँ ।
— दास
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Poetry & Stories

  1. बादि छवो रस व्यँजन खाइबो बादि नवो रस मिश्रित गाइबो - दास

    बादि छवो रस व्यँजन खाइबो बादि नवो रस मिश्रित गाइबो ।बादि जराय प्रजँक बिछाय प्रसून धने परि पाइ लुटाइबो ।

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  2. लेहु जु लाई हौँ गेह तिहारे परे जेहि नेह सँदेस खरे मैँ - दास

    लेहु जु लाई हौँ गेह तिहारे परे जेहि नेह सँदेस खरे मैँ ।भेटौ भुजा भरि मेटौ बिथान समेटौजू तौ सब साध भरे मैँ ।

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  3. जोहे जाहि चाँदनी की लागति भली न छवि - दास

    जोहे जाहि चाँदनी की लागति भली न छवि ,चँपक गुलाब सोन जुही जोति वारी है ।

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  4. धूरि चढ़ै नभ पौन प्रसँग तें कीच भई जल संगति पाई - दास

    धूरि चढ़ै नभ पौन प्रसँग तें कीच भई जल संगति पाई ।फूल मिलैँ नृप पै पहुँचैं कृमि काठन सँग अनेक बिथाई ।

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  5. झाँझरियाँ झनकैगीँ खरी खनकैगीँ चुरी तन को तन तोरे - दास

    झाँझरियाँ झनकैगीँ खरी खनकैगीँ चुरी तन को तन तोरे ।दासजू जागती पास अली परिहास करैँगी सबै उठि भोरे ।

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