Selected Quotes
Poetry & Stories
बादि छवो रस व्यँजन खाइबो बादि नवो रस मिश्रित गाइबो - दास
बादि छवो रस व्यँजन खाइबो बादि नवो रस मिश्रित गाइबो ।बादि जराय प्रजँक बिछाय प्रसून धने परि पाइ लुटाइबो ।
लेहु जु लाई हौँ गेह तिहारे परे जेहि नेह सँदेस खरे मैँ - दास
लेहु जु लाई हौँ गेह तिहारे परे जेहि नेह सँदेस खरे मैँ ।भेटौ भुजा भरि मेटौ बिथान समेटौजू तौ सब साध भरे मैँ ।
जोहे जाहि चाँदनी की लागति भली न छवि - दास
जोहे जाहि चाँदनी की लागति भली न छवि ,चँपक गुलाब सोन जुही जोति वारी है ।
धूरि चढ़ै नभ पौन प्रसँग तें कीच भई जल संगति पाई - दास
धूरि चढ़ै नभ पौन प्रसँग तें कीच भई जल संगति पाई ।फूल मिलैँ नृप पै पहुँचैं कृमि काठन सँग अनेक बिथाई ।
झाँझरियाँ झनकैगीँ खरी खनकैगीँ चुरी तन को तन तोरे - दास
झाँझरियाँ झनकैगीँ खरी खनकैगीँ चुरी तन को तन तोरे ।दासजू जागती पास अली परिहास करैँगी सबै उठि भोरे ।
दास: Quick Answers
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Poems & Stories by दास
बादि छवो रस व्यँजन खाइबो बादि नवो रस मिश्रित गाइबो - दास
बादि छवो रस व्यँजन खाइबो बादि नवो रस मिश्रित गाइबो ।बादि जराय प्रजँक बिछाय प्रसून धने परि पाइ लुटाइबो ।
लेहु जु लाई हौँ गेह तिहारे परे जेहि नेह सँदेस खरे मैँ - दास
लेहु जु लाई हौँ गेह तिहारे परे जेहि नेह सँदेस खरे मैँ ।भेटौ भुजा भरि मेटौ बिथान समेटौजू तौ सब साध भरे मैँ ।
जोहे जाहि चाँदनी की लागति भली न छवि - दास
जोहे जाहि चाँदनी की लागति भली न छवि ,चँपक गुलाब सोन जुही जोति वारी है ।
धूरि चढ़ै नभ पौन प्रसँग तें कीच भई जल संगति पाई - दास
धूरि चढ़ै नभ पौन प्रसँग तें कीच भई जल संगति पाई ।फूल मिलैँ नृप पै पहुँचैं कृमि काठन सँग अनेक बिथाई ।
झाँझरियाँ झनकैगीँ खरी खनकैगीँ चुरी तन को तन तोरे - दास
झाँझरियाँ झनकैगीँ खरी खनकैगीँ चुरी तन को तन तोरे ।दासजू जागती पास अली परिहास करैँगी सबै उठि भोरे ।
बार अंध्यारनि मैँ भटक्यो हौँ - दास
बार अंध्यारनि मैँ भटक्यो हौँ ,निकारयो मैँ नीठि सुबुद्धिन सोँ धरि।
बात चलै की चली जबतेँ तबतेँ चले काम के तीर हजारन - दास
बात चलै की चली जबतेँ तबतेँ चले काम के तीर हजारन ।नीँद औ भूख चली तबतेँ अँसुवा चले नैननि ते सजि धारन ।
वाही घरी तें न सान रहै - दास
वाही घरी तें न सान रहै,न गुमान रहै,न रही सुघराई.दास न लाज को साज रहै न रहै तनको घरकाज की घाईं.
नैनन को तरसैए कहाँ लौं - दास
नैनन को तरसैए कहाँ लौं,कहा ली हियो बिरहागि मैं तैए.एक घरी न कहूँ कल पैए,कहाँ लगि प्रानन को कलपैए.
ऊधो!तहाँई चलि लै हमें - दास
उधो! तहाँई चलो लै हमें जहँ कुबरि कान्ह बसै एक ठोरी.देखिय दास अघाय अघाय तिहारे प्रसाद मनोहर जोरी.
कढिकै निसंक पैठि जाती झुंड झुंडन में - दास
कढिकै निसंक पैठि जाति झुंड झुंडन में,लोगनि को देख दास आनंद पगति है
अब तो बिहारी के वे बानक गए री - दास
अब तो बिहारी के वे बानक गए री,तेरीतन दूति केसर को नैन कसमीर भो.
Selected Quotes by दास (चुनिंदा उद्धरण)
बादि छवो रस व्यँजन खाइबो बादि नवो रस मिश्रित गाइबो ।बादि जराय प्रजँक बिछाय प्रसून धने परि पाइ लुटाइबो ।लेहु जु लाई हौँ गेह तिहारे परे जेहि नेह सँदेस खरे मैँ ।भेटौ भुजा भरि मेटौ बिथान समेटौजू तौ सब साध भरे मैँ ।जोहे जाहि चाँदनी की लागति भली न छवि ,चँपक गुलाब सोन जुही जोति वारी है ।धूरि चढ़ै नभ पौन प्रसँग तें कीच भई जल संगति पाई ।फूल मिलैँ नृप पै पहुँचैं कृमि काठन सँग अनेक बिथाई ।झाँझरियाँ झनकैगीँ खरी खनकैगीँ चुरी तन को तन तोरे ।दासजू जागती पास अली परिहास करैँगी सबै उठि भोरे ।बार अंध्यारनि मैँ भटक्यो हौँ ,निकारयो मैँ नीठि सुबुद्धिन सोँ धरि।Videos on दास
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