यह एक कील मुबारक हो ! - बोधिसत्व

बोधिसत्वबोधिसत्व11 Sept 1968

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यह एक कील मुबारक हो !

एक कील गांधी की छाती पर, बधाई हो !
एक कील राम के माथे पर, बधाई हो ।

एक कील बुद्ध के कण्ठ में
एक कील कृष्ण के तलुवे में
एक कील अम्बेडकर की पीठ पर
एक कील ईसा की हथेली में
एक कील मुहम्मद की कलाई पर
एक कील नानक के घुटनों में, बधाई हो ।

एक कील भारत माँ की आँखों में
एक कील नेहरू की कनपटी पर
एक कील सुभाष के कन्धे पर
एक कील पटेल के पेट में
एक कील विवेकानन्द की वाणी में
एक कील भगत सिंह की नाड़ी में, मुबारक हो !

एक कील अकबर नथुनों में
एक कील राणा प्रताप के नाखूनों में
एक कील परम हंस की ग्रीवा में
एक कील मां शारदा के कपाल में
सादर समर्पित है !

एक कील सावित्री फुले की खोपड़ी में
एक कील रानी झाँसी की रीढ़ की हड्डी में !

एक कील मेरी आतों में
एक कील तुम्हारी जीभ में
एक कील संविधान के पृष्ठ पर
एक कील नए बिहान की दृष्टि पर
बधाई हो !

एक कील हमारे कौर में
एक कील भीष्म के ठौर में
सप्रेम अर्पित !

एक कील हम सब को मिले
एक कील हमारे उर में अग्नि सम खिले !
बोधिसत्व
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