साहित्य-तूणीर में एक ही कविता-बाण को डालकर साहित्य-मृगया-विनोदियों के साथ कवि सम्मेलन के जंगलों में मैं शिकार खेल सकता हूँ, अनायास ही मिले शाल के हिरन को भुजाओं पर डालकर सगर्व घर लौट सकता हूँ। #कविता#कवि#साहित्य#जंगल#घर#तेलुगु कविता#गर्व#खेल#जंगJoin Our WhatsApp Community