कवि-सम्मेलन

बी. गोपाल रेड्डीबी. गोपाल रेड्डी

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साहित्य-तूणीर में

एक ही कविता-बाण को डालकर

साहित्य-मृगया-विनोदियों के साथ

कवि सम्मेलन के जंगलों में

मैं शिकार खेल सकता हूँ,

अनायास ही मिले

शाल के हिरन को

भुजाओं पर डालकर

सगर्व घर लौट सकता हूँ।

बी. गोपाल रेड्डी
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बी. गोपाल रेड्डी

बी. गोपाल रेड्डी

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