चन्दा मामा दौड़े आओ,
दूध कटोरा भर कर लाओ ।
उसे प्यार से मुझे पिलाओ,
मुझ पर छिड़क चाँदनी जाओ ।
मैं तैरा मृग छौना लूँगा,
उसके साथ हँसूँ खेलूँगा ।
उसकी उछल कूद देखूँगा,
उसको चाटूँगा चूमूँगा ।
चन्दा मामा दौड़े आओ,
दूध कटोरा भर कर लाओ ।
उसे प्यार से मुझे पिलाओ,
मुझ पर छिड़क चाँदनी जाओ ।
मैं तैरा मृग छौना लूँगा,
उसके साथ हँसूँ खेलूँगा ।
उसकी उछल कूद देखूँगा,
उसको चाटूँगा चूमूँगा ।

Ayodhya Singh Upadhyay ‘Hari Oudh', (15 April 1865 – 16 March 1947) was a writer of Hindi literature. He has been the Chairman of the Hindi Sahitya Sammelan and had been conferred the title of Vidyavachaspati.
View profile & all 40 Poems / Storiesउठो लाल अब आँखे खोलोपानी लाई हूँ मुँह धो लो
आ री नींद, लाल को आ जा।उसको करके प्यार सुला जा।।
उमंगों भरा दिल किसी का न टूटे।पलट जायँ पासे मगर जुग न फूटे।
देख कर बाधा विविध, बहु विघ्न घबराते नहींरह भरोसे भाग्य के दुख भोग पछताते नहीं
आँख का आँसू ढलकता देख कर।जी तड़प करके हमारा रह गया।