About अंजुम आज़मी
उपनाम : 'अंजुम' मूल नाम : मुश्ताक़ अहमद जन्म : 02 Jan 1931 | आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश निधन : 31 Jan 1990 | कराची, सिंध
Selected Quotes
About अंजुम आज़मी
उपनाम : 'अंजुम'
मूल नाम : मुश्ताक़ अहमद
जन्म : 02 Jan 1931 | आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश
निधन : 31 Jan 1990 | कराची, सिंध
अंजुम आज़मी: Quick Answers
Who is अंजुम आज़मी?
उपनाम : 'अंजुम' मूल नाम : मुश्ताक़ अहमद जन्म : 02 Jan 1931 | आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश निधन : 31 Jan 1990 | कराची, सिंध
When was अंजुम आज़मी born?
अंजुम आज़मी was born on 2 January 1931. Associated place: कराची, पाकिस्तान.
When did अंजुम आज़मी die?
अंजुम आज़मी passed away on 31 January 1990.
Where can I read अंजुम आज़मी's poetry?
Kavishala has 13 couplets (sher) by अंजुम आज़मी, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by अंजुम आज़मी
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Selected Quotes by अंजुम आज़मी (चुनिंदा उद्धरण)
तुझ से पर्दा नहीं मिरे ग़म का तू मिरी ज़िंदगी का महरम हैदिल न का'बा है ने कलीसा है तेरा घर है हरीम-ए-मरियम हैबिठा के सामने तुम को बहार में पी है तुम्हारे रिंद ने तौबा भी रू-ब-रू कर लीअब न वो जोश-ए-वफ़ा है न वो अंदाज़-ए-तलब अब भी लेकिन तिरे कूचे से गुज़र होता हैकोई तो ख़ैर का पहलू भी निकले अकेला किस तरह ये शर रहेगाइलाज उस का गुज़र जाना है जाँ से गुज़र जाने का जाँ से डर रहेगाCouplets (Sher) by अंजुम आज़मी
तुझ से पर्दा नहीं मिरे ग़म का तू मिरी ज़िंदगी का महरम हैदिल न का'बा है ने कलीसा है तेरा घर है हरीम-ए-मरियम हैबिठा के सामने तुम को बहार में पी है तुम्हारे रिंद ने तौबा भी रू-ब-रू कर लीअब न वो जोश-ए-वफ़ा है न वो अंदाज़-ए-तलब अब भी लेकिन तिरे कूचे से गुज़र होता हैकोई तो ख़ैर का पहलू भी निकले अकेला किस तरह ये शर रहेगाइलाज उस का गुज़र जाना है जाँ से गुज़र जाने का जाँ से डर रहेगाख़ाक ने कितने बद-अतवार किए हैं पैदा ये न होते तो उसी ख़ाक से क्या क्या होताख़ाली भी तो कर ख़ाना-ए-दिल दुनिया से इस घर में मिरी जान ख़ुदा आएगाआओ ख़ुश हो के पियो कुछ न कहो वाइज़ को मय-कदे में वो तमाशाई है कुछ और नहींग़लत है जज़्बा-ए-दिल पर नहीं कोई इल्ज़ाम ख़ुशी मिली न हमें जब तो ग़म की ख़ू कर लीमेरी दुनिया में अभी रक़्स-ए-शरर होता है जो भी होता है ब-अंदाज़-ए-दिगर होता हैनिकलो भी कभी सूद-ओ-ज़ियाँ से वर्ना कूचे में तिरे कौन भला आएगाक्यूँ हुआ मुझ को इनायत की नज़र का सौदा आज रुस्वाई ही रुस्वाई है कुछ और नहीं
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