ख़मोशी साज़ होती जा रही है

Anand Narain MullaAnand Narain Mulla1 Oct 1901 – 12 Jun 1997

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ख़मोशी साज़ होती जा रही है
नज़र आवाज़ होती जा रही है

नज़र तेरी जो इक दिल की किरन थी
ज़माना-साज़ होती जा रही है

नहीं आता समझ में शोर-ए-हस्ती
बस इक आवाज़ होती जा रही है

ख़मोशी जो कभी थी पर्दा-ए-ग़म
यही ग़म्माज़ होती जा रही है

बदी के सामने नेकी अभी तक
सिपर-अंदाज़ होती जा रही है

ग़ज़ल 'मुल्ला' तेरे सेहर-ए-बयाँ से
अजब एजाज़ होती जा रही है

Anand Narain Mulla
About the poet

Anand Narain Mulla

Anand Narain Mulla (October 1901–12 June 1997)was an Urdu poet of India. Anand Narain Mulla was born at Lucknow in October 1901 and educated at Government Jubilee High School and College there. He won the Sahitya Akademi award in Urdu in 1964 for his poetry,…

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