सफ़-ए-अव्वाल से फ़क्त एक ही मयक्वार उठा ।
कितनी सुनासान है तेरी महफ़िल साकी ।।
ख़त्म हो जाए न कहीं ख़ुशबू भी फूलों के साथ,
यही खुशबू तो है इस बज़्म का हासिल साखी ।
सफ़-ए-अव्वाल से फ़क्त एक ही मयक्वार उठा ।
कितनी सुनासान है तेरी महफ़िल साकी ।।
ख़त्म हो जाए न कहीं ख़ुशबू भी फूलों के साथ,
यही खुशबू तो है इस बज़्म का हासिल साखी ।

Anand Narain Mulla (October 1901–12 June 1997)was an Urdu poet of India. Anand Narain Mulla was born at Lucknow in October 1901 and educated at Government Jubilee High School and College there. He won the Sahitya Akademi award in Urdu in 1964 for his poetry,…
View profile & all 9 Poems / Storiesनिगाहों दिल का अफ़साना करीब-ए-इख्तिताम आया ।हमें अब इससे क्या आया शहर या वक्त-ए-शाम आया ।।
वतन फिर तुझको पैमाने-वफ़ा देने का वक़्त आयातिरे नामूस पर सब कुछ लुटा देने का वक़्त आया
भूले से भी लब पर सुख़न अपना नहीं आताहाँ हाँ मुझे दुनिया में पनपना नहीं आता
दिल की दिल को ख़बर नहीं मिलतीजब नज़र से नज़र नहीं मिलती
दुनिया है ये किसी का न इस में क़ुसूर थादो दोस्तों का मिल के बिछड़ना ज़रूर था