अम्मा मेरे बाबा को भेजो री - कि सावन आया
बेटी तेरा बाबा तो बूढ़ा री - कि सावन आया
अम्मा मेरे भाई को भेजो री - कि सावन आया
बेटी तेरा भाई तो बाला री - कि सावन आया
अम्मा मेरे मामू को भेजो री - कि सावन आया
बेटी तेरा मामू तो बांका री - कि सावन आया
अम्मा मेरे बाबा को भेजो री - कि सावन आया
बेटी तेरा बाबा तो बूढ़ा री - कि सावन आया
अम्मा मेरे भाई को भेजो री - कि सावन आया
बेटी तेरा भाई तो बाला री - कि सावन आया
अम्मा मेरे मामू को भेजो री - कि सावन आया
बेटी तेरा मामू तो बांका री - कि सावन आया

Abu'l Hasan Yamīn ud-Dīn Khusrau (Urdu: ابو الحسن یمین الدین خسرو) (1253–1325), better known as Amīr Khusrau (अमीर ख़ुसरो) Dehlavī (Also known as 'Amir Khusro امیر خسرو') was a Sufi singer, poet and scholar from India. He was an iconic figure in the cultural…
View profile & all 17 Poems / Storiesआ घिर आई दई मारी घटा कारी। बन बोलन लागे मोर दैया रीबन बोलन लगे मोर। रिम-झिम रिम-झिम बरसन लागी छाय री चहुँ ओर।
आज रंग है ऐ माँ रंग है री,मेरे महबूब के घर रंग है री।
अब आए न मोरे साँवरिया, मैं तो तन मन उन पर लुटा देती।घर आए न मोरे साँवरिया, मैं तो तन मन उन पर लुटा देती।
रैनी चढ़ी रसूल की सो रंग मौला के हाथ।जिसके कपरे रंग दिए सो धन धन वाके भाग।।
आ साजन मोरे नयनन में, सो पलक ढाप तोहे दूँ।न मैं देखूँ औरन को, न तोहे देखन दूँ।