अति अनियारे मनौ सान दै सुधारे

Abdul Rahim Khan-i-KhananRahim17 Dec 1556 – 10 Jan 1627

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अति अनियारे मनौ सान दै सुधारे,

महा विष के बिषारे ये करत पर तान हैं।

ऐसे अपराधी देख अगम अगाधी यहै,

साधना जो साधी हरि हिय में अन्हात हैं॥

बार-बार बोरे याते लाल-लाल डोरे भए,

तौ हूँ तो रहीम थोरे बिधि ना सकात हैं।

घाइक घनेरे, दुखदाइक हैं नेरे नित,

नैन-बान तेरे उर बेधि-बेधि जात हैं॥

Abdul Rahim Khan-i-Khanan
About the poet

Abdul Rahim Khan-i-Khanan Rahim

Khanzada Mirza Khan Abdul Rahim Khan-i-Khanan (17 December 1556 – 1 October 1627), popularly known as simply Rahim, was a poet who lived in India during the rule of Mughal emperor Akbar, who was his mentor, also. He was one of the nine important ministers (de…

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