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अबरार आज़मी: Quick Answers
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Poems & Stories by अबरार आज़मी
Selected Quotes by अबरार आज़मी (चुनिंदा उद्धरण)
कमरे में धुआँ दर्द की पहचान बना था कल रात कोई फिर मिरा मेहमान बना थातमाम रात वो पहलू को गर्म करता रहा किसी की याद का नश्शा शराब जैसा थापरिंदे फ़ज़ाओं में फिर खो गए धुआँ ही धुआँ आशियानों में थामुझे भी फ़ुर्सत-ए-नज़्ज़ारा-ए-जमाल न थी और उस को पास किसी और के भी जाना थाआवाज़ों का बोझ उठाए सदियों से बंजारों की तरह गुज़ारा करता हूँशायद तुम्हारी याद मिरे पास आ गई या है मिरे ही दिल की सदा सोचना पड़ाCouplets (Sher) by अबरार आज़मी
कमरे में धुआँ दर्द की पहचान बना था कल रात कोई फिर मिरा मेहमान बना थातमाम रात वो पहलू को गर्म करता रहा किसी की याद का नश्शा शराब जैसा थापरिंदे फ़ज़ाओं में फिर खो गए धुआँ ही धुआँ आशियानों में थामुझे भी फ़ुर्सत-ए-नज़्ज़ारा-ए-जमाल न थी और उस को पास किसी और के भी जाना थाआवाज़ों का बोझ उठाए सदियों से बंजारों की तरह गुज़ारा करता हूँशायद तुम्हारी याद मिरे पास आ गई या है मिरे ही दिल की सदा सोचना पड़ामैं ने कल तोड़ा इक आईना तो महसूस हुआ इस में पोशीदा कोई चीज़ थी जौहर जैसीचेहरों के मैले जिस्मों के जंगल थे हर जगह उन में कहीं भी कोई मगर आदमी न थाख़ुशनुमा दीवार-ओ-दर के ख़्वाब ही देखा किए जिस्म सहरा ज़ेहन वीराँ आँख गीली हो गई
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