Couplets · शेर

Every Sher, In One Place

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ज़िंदगी Sher

24 sher

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकलेबहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

मिर्ज़ा ग़ालिब

ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान हैहम तो इस जीने के हाथों मर चले

ख़्वाजा मीर दर्द

ज़िंदगी जब्र है और जब्र के आसार नहींहाए इस क़ैद को ज़ंजीर भी दरकार नहीं

फ़ानी बदायुनी

ज़िंदगी क्या है अनासिर में ज़ुहूर-ए-तरतीबमौत क्या है इन्हीं अज्ज़ा का परेशाँ होना

बृज नारायण चकबस्त

अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझेबे-हिस बना चुकी है बहुत ज़िंदगी मुझे

Shakeel Badayuni

ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी है ज़मींपाँव फैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है

बशीर बद्र

देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब सेचेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से

Sahir Ludhianvi

ये चार दिन के तमाशे हैं आह दुनिया केरहा जहाँ में सिकंदर न और न जम बाक़ी

भारतेंदु हरिश्चंद्र

अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-ए-ज़िंदगीतू अगर मेरा नहीं बनता न बन अपना तो बन

अल्लामा इक़बाल

ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो हैक्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम

Sahir Ludhianvi

हस्ती अपनी हबाब की सी हैये नुमाइश सराब की सी है

मीर तक़ी मीर

अमल से ज़िंदगी बनती है जन्नत भी जहन्नम भीये ख़ाकी अपनी फ़ितरत में न नूरी है न नारी है

अल्लामा इक़बाल

तुम मोहब्बत को खेल कहते होहम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली

बशीर बद्र

इस तरह ज़िंदगी ने दिया है हमारा साथजैसे कोई निबाह रहा हो रक़ीब से

Sahir Ludhianvi

मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गयाहर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया

Sahir Ludhianvi

न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होताडुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता

मिर्ज़ा ग़ालिब

बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होनाआदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना

मिर्ज़ा ग़ालिब

हम ग़म-ज़दा हैं लाएँ कहाँ से ख़ुशी के गीतदेंगे वही जो पाएँगे इस ज़िंदगी से हम

Sahir Ludhianvi

गर ज़िंदगी में मिल गए फिर इत्तिफ़ाक़ सेपूछेंगे अपना हाल तिरी बेबसी से हम

Sahir Ludhianvi

ज़िंदगी अपनी जब इस शक्ल से गुज़री 'ग़ालिब'हम भी क्या याद करेंगे कि ख़ुदा रखते थे

मिर्ज़ा ग़ालिब

क़ैद-ए-हयात ओ बंद-ए-ग़म अस्ल में दोनों एक हैंमौत से पहले आदमी ग़म से नजात पाए क्यूँ

मिर्ज़ा ग़ालिब

मिरी ज़िंदगी पे न मुस्कुरा मुझे ज़िंदगी का अलम नहींजिसे तेरे ग़म से हो वास्ता वो ख़िज़ाँ बहार से कम नहीं

Shakeel Badayuni

किस दर्जा दिल-शिकन थे मोहब्बत के हादसेहम ज़िंदगी में फिर कोई अरमाँ न कर सके

Sahir Ludhianvi

है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम हैकहीं कारोबार सी दोपहर कहीं बद-मिज़ाज सी शाम है

बशीर बद्र