Couplets · शेर

Every Sher, In One Place

A whole poem in two lines — find one by topic, poet or first letter.

विसाल Sher

6 sher

वस्ल का दिन और इतना मुख़्तसरदिन गिने जाते थे इस दिन के लिए

अमीर मीनाई

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होताअगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता

मिर्ज़ा ग़ालिब

फिर बैठे बैठे वादा-ए-वस्ल उस ने कर लियाफिर उठ खड़ा हुआ वही रोग इंतिज़ार का

अमीर मीनाई

चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँतेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ

Sahir Ludhianvi

भला हम मिले भी तो क्या मिले वही दूरियाँ वही फ़ासलेन कभी हमारे क़दम बढ़े न कभी तुम्हारी झिजक गई

बशीर बद्र

वस्ल हो जाए यहीं हश्र में क्या रक्खा हैआज की बात को क्यूँ कल पे उठा रक्खा है

अमीर मीनाई