Couplets · शेर
Every Sher, In One Place
A whole poem in two lines — find one by topic, poet or first letter.
विसाल Sher
6 sher
वस्ल का दिन और इतना मुख़्तसरदिन गिने जाते थे इस दिन के लिए

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होताअगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता

फिर बैठे बैठे वादा-ए-वस्ल उस ने कर लियाफिर उठ खड़ा हुआ वही रोग इंतिज़ार का

चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँतेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ

भला हम मिले भी तो क्या मिले वही दूरियाँ वही फ़ासलेन कभी हमारे क़दम बढ़े न कभी तुम्हारी झिजक गई

वस्ल हो जाए यहीं हश्र में क्या रक्खा हैआज की बात को क्यूँ कल पे उठा रक्खा है
