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माँ Sher
16 sher
भूके बच्चों की तसल्ली के लिएमाँ ने फिर पानी पकाया देर तक

चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी हैमैं ने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है

भूके बच्चों की तसल्ली के लिएमाँ ने फिर पानी पकाया देर तक

अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगामैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती हैमाँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है

किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आईमैं घर में सब से छोटा था मिरे हिस्से में माँ आई

जब भी कश्ती मिरी सैलाब में आ जाती हैमाँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है

कल अपने-आप को देखा था माँ की आँखों मेंये आईना हमें बूढ़ा नहीं बताता है

तेरे दामन में सितारे हैं तो होंगे ऐ फ़लकमुझ को अपनी माँ की मैली ओढ़नी अच्छी लगी

मुनव्वर माँ के आगे यूँ कभी खुल कर नहीं रोनाजहाँ बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती

बर्बाद कर दिया हमें परदेस ने मगरमाँ सब से कह रही है कि बेटा मज़े में है

ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकतामैं जब तक घर न लौटूँ मेरी माँ सज्दे में रहती है

मैं ने कल शब चाहतों की सब किताबें फाड़ देंसिर्फ़ इक काग़ज़ पे लिक्खा लफ़्ज़-ए-माँ रहने दिया

दिन भर की मशक़्क़त से बदन चूर है लेकिनमाँ ने मुझे देखा तो थकन भूल गई है

शहर के रस्ते हों चाहे गाँव की पगडंडियाँमाँ की उँगली थाम कर चलना बहुत अच्छा लगा

माँ ख़्वाब में आ कर ये बता जाती है हर रोज़बोसीदा सी ओढ़ी हुई इस शाल में हम हैं
