Couplets · शेर

Every Sher, In One Place

A whole poem in two lines — find one by topic, poet or first letter.

ख़्वाब Sher

9 sher

अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करोतुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो

मुनव्वर राना

ढूँडोगे अगर मुल्कों मुल्कों मिलने के नहीं नायाब हैं हमजो याद न आए भूल के फिर ऐ हम-नफ़सो वो ख़्वाब हैं हम

शाद अज़ीमाबादी

कभी जो यार को देखा तो ख़्वाब में देखामिरी मुराद भी आई तो मुस्तआर आई

आग़ा हज्जू शरफ़

ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहेनींद रक्खो या न रक्खो ख़्वाब मेयारी रखो

Rahat Indori

नहीं करते वो बातें आलम-ए-रूया में भी हम सेख़ुशी के ख़्वाब भी देखें तो बे-ताबीर होते हैं

आग़ा हज्जू शरफ़

जिस तरह ख़्वाब मिरे हो गए रेज़ा रेज़ाउस तरह से न कभी टूट के बिखरे कोई

Parveen Shakir

क्या हसीं ख़्वाब मोहब्बत ने दिखाया था हमेंखुल गई आँख तो ताबीर पे रोना आया

Shakeel Badayuni

बारहा तेरा इंतिज़ार कियाअपने ख़्वाबों में इक दुल्हन की तरह

Parveen Shakir

मेरे ख़्वाबों में भी तू मेरे ख़यालों में भी तूकौन सी चीज़ तुझे तुझ से जुदा पेश करूँ

Sahir Ludhianvi