Couplets · शेर

Every Sher, In One Place

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ख़ुदा Sher

16 sher

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहलेख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है

अल्लामा इक़बाल

कश्तियाँ सब की किनारे पे पहुँच जाती हैंनाख़ुदा जिन का नहीं उन का ख़ुदा होता है

अमीर मीनाई

तेरी बख़्शिश के भरोसे पे ख़ताएँ की हैंतेरी रहमत के सहारे ने गुनहगार किया

मुबारक अज़ीमाबादी

तर-दामनी पे शैख़ हमारी न जाइयोदामन निचोड़ दें तो फ़रिश्ते वुज़ू करें

ख़्वाजा मीर दर्द

रहने दे अपनी बंदगी ज़ाहिदबे-मोहब्बत ख़ुदा नहीं मिलता

मुबारक अज़ीमाबादी

उम्र सारी तो कटी इश्क़-ए-बुताँ में 'मोमिन'आख़िरी वक़्त में क्या ख़ाक मुसलमाँ होंगे

मोमिन ख़ाँ मोमिन

हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिनदिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है

मिर्ज़ा ग़ालिब

अब तो जाते हैं बुत-कदे से 'मीर'फिर मिलेंगे अगर ख़ुदा लाया

मीर तक़ी मीर

काबा किस मुँह से जाओगे 'ग़ालिब'शर्म तुम को मगर नहीं आती

मिर्ज़ा ग़ालिब

न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होताडुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता

मिर्ज़ा ग़ालिब

जो चाहिए सो माँगिये अल्लाह से 'अमीर'उस दर पे आबरू नहीं जाती सवाल से

अमीर मीनाई

ज़िंदगी अपनी जब इस शक्ल से गुज़री 'ग़ालिब'हम भी क्या याद करेंगे कि ख़ुदा रखते थे

मिर्ज़ा ग़ालिब

ये मसाइल-ए-तसव्वुफ़ ये तिरा बयान 'ग़ालिब'तुझे हम वली समझते जो न बादा-ख़्वार होता

मिर्ज़ा ग़ालिब

देख छोटों को है अल्लाह बड़ाई देताआसमाँ आँख के तिल में है दिखाई देता

शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम हैरहे सामने और दिखाई न दे

बशीर बद्र

अरे ओ आसमाँ वाले बता इस में बुरा क्या हैख़ुशी के चार झोंके गर इधर से भी गुज़र जाएँ

Sahir Ludhianvi