Couplets · शेर

Every Sher, In One Place

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दर्द Sher

6 sher

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या हैआख़िर इस दर्द की दवा क्या है

मिर्ज़ा ग़ालिब

देख तो दिल कि जाँ से उठता हैये धुआँ सा कहाँ से उठता है

मीर तक़ी मीर

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइलजब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है

मिर्ज़ा ग़ालिब

दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआमैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ

मिर्ज़ा ग़ालिब

पहलू में मेरे दिल को न ऐ दर्द कर तलाशमुद्दत हुई ग़रीब वतन से निकल गया

अमीर मीनाई

दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यूँरोएँगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यूँ

मिर्ज़ा ग़ालिब