
कभी-कभी तो जैसे वो अकड़ू बन जाती हैं,
और कभी हर बात पर बचकानी हरकत करती हैं,
कभी-कभी खुद हद से ज्यादा बेपरवाह हो जाती हैं,
और कभी मेरी लापरवाही पर खुद परेशान हो जाया करती हैं,
कभी-कभी गलतियों पर मेरी गुस्सा बड़ा हो जाती हैं,
और कभी मुझे मनाने की खातिर प्यारी - सी बातें करती हैं,
कभी-कभी मेरी तन्हा रातों की
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