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दिसंबर


बाहर धरती कोहरा ओढ़ेअंदर हम रज़ाईउसको याद वसंत कीहमको याद तुम्हारी आयी

उसको याद वो पुष्प वो खुशबूचहु ओर हरियालीहमको बस वो कत्थई ऑंखेंऔर गर्म चाय की प्याली

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