वीरान बस्तियाँ's image
403K

वीरान बस्तियाँ


मज़हब उलझते आपस में

है जात पात की रस्साकसी


बेधकर प्रेम के घरौंदों को

है मचाई नफ़रतों ने त्रासदी


आँसुओं के उबलते सैलाब

Read More! Earn More! Learn More!