माना स्वर्ण की तुझे प्यास हैपर ये रजत भी अति खास हैमन तेरे हौसला और विश्वास है‘नीरज’ फिर तू क्यूँ निराश है
माना स्वर्ण की तुझे प्यास हैपर ये रजत भी अति खास है
मन तेरे हौसला और विश्वास है‘नीरज’ फिर तू क्यूँ निराश है