अक्सर लोग कहते हैं अंधेरी तूफानी रात के बाद सुनहरी सुबह होती है लेकिन मेरे लिए वह अंधेरी तूफानी रात सुनहरी सुबह भी थी


उस रात शायद समय रुक गया था लेकिन मेरे लिए वह सबसे छोटी रात थी


उस रात दो जिस्म नहीं थे बल्कि एक जिस्म दो रूह थी


उस रात शायद तुमने कुछ भी नहीं बोला था लेकिन मैंने एक एक शब्द सुना था


उस रात भले ही तेरे हाथों को बहुत कसके पकड़ा था लेकिन उतनी कोमलता से तुझे कभी छुआ भी नहीं था


उस रात दोनों की आंखें बंद थी लेकिन जिस्मों ने एक-एक हरकत देखी थी


उस रात तेरे प्यार से ज्यादा तेरी जुल्फों ने घेरा था मुझे


उस रात बाहर बहुत बारिश हो रही थी लेकिन जिस्म प्यासे थे


उस रात सर्दी तो बहुत थी लेकिन पसीना नहीं रुक रहा था


उस रात सिगरेट नहीं थी हाथ में लेकिन फिर भी नशा था


उस रात बादल खूब गरजे थे लेकिन फिर भी खामोशी थी


उस रात बिजली भी तो चली गई थी लेकिन सिर्फ दुनिया के लिये


सच कहूं तो वह मेरे लिए पहली ऐसी रात थी जब अगले दिन के सूरज को देखने की ना उम्मीद थी ना ख्वाहिश