प्रेमसंघर्ष में आहत प्रेमी का प्रणय निवेदित गीत आपके समक्ष रखती हूं।_
कर दिया सब अर्पण है प्रेम में तुम्हें
हो गये है तेरे , स्वीकार लो हमें,, स्वीकार लो हमें
इस जग के तानों ने, शब्दों के बाणों ने
अपने-बेगानो ने,जाने -अनजानो ने
भेदा हमे कैसे,, बताएं क्या तुम्हें
हो गये है..........
मन भी टूटे हमसे, नाते छूटे हमसे
अंखियों से अश्रुधार निकल के कहती हमसे
हारे हैं कितना हम प्यार कर तुम्हें
हो गये है......
सरिता
