मैं पागल हूं,दीवाना हूं
के जैसा हूं तुम्हारा हूं,
तुम्हारी कामिनी चितवन
पे अब तो दिल मैं हारा हूं।।
तेरे केशो की सुंदरता में
अब दिन रात हूं डूबा,
मृदुल सा आचरण तेरा,
किए हैं हृदय में बसेरा।।
कई आशिक गए आए
नहीं इस रत्न को पाए,
तेरा है शुक्रिया हमदम
जौहरी हमको माना है।।
सरिता


