हमीं से झगड़ा करते हो,हमीं से प्यार करते हो

अरे ओ बेरहम हमपे क्यूं इतने वार करते हो




प्यार करते हो तो फिर गुस्सा हमें तुम क्यूं दिलाते हों

रूठ जाते हैं तुमसे फिर हमें तुम क्यूं मनाते हों

   चढ़ा कर बाण शब्दों के हृदय के पार करते हो

     हमीं से झगड़ा करते हो..........


जगह दी है हृदय में तुम्हें; लाभ तुम खूब उठाते हो

इतने जलवे, इतने नखरे हमें हीं सिर्फ दिखाते हों

    हृदय में रहकर भी तुम तो हृदय को समझ न पाते हो

    हमीं से झगड़ा करते हो.......


जरा सी बात पर हमदम, हमें तुम कितना रुलाते हों 

झगड़ कर देर तक हमसे, चुटकियों में भुलाते हो

    प्रेम को मेरे हर पल क्यूं तुम ऐसे आजमाते हो

    हमीं से झगड़ा करते हो......

     

सरिता