खो गया है कुछ कहीं,
न हूँ उदास, न है खुशी
बेपरवाह से वो दिन ढल गये
बोझिल रातों में बदल गये
शायद सुकूँ को भूल गया
कहीं रख कर
जगती रहती हैं आँखे
अब रातभर
ख़्वाब में ही ज़िन्दगी से
मुलाकात होती है
है मुक्कमल सा साथ नहीं,
रोजमर्रा की बात होती है
जाने कहाँ गुम हो गए,
वो बेफिक्र क़हक़हे
वो दिन अब न रहे
- S. Suman


