मनुजता के बीज लेकर, जब कोई 'राम' धरा पर आएगा
इस धरती का अत्याचार, शायद तभी थम पायेगा
तथाकथित भविष्यवेत्ताओं की ,सोच अभी नहीं हारी है
किसी कल्पित उद्धारक की , तलाश अभी भी जारी है
बनेगा भारत धर्मगुरु फिर से,
आएगी वेदऋचायें , हिमगिरि से
भाग्यपूजक मनीषियों ने ,ये भविष्यवाणी उचारि है
किसी कल्पित उद्धारक...
सौप गए सत्ता हमें, कह गए बनाये रखना
इस भारत-भूमि को ,स्वर्ग-सा सजाये रखना
है चूर यहाँ सपने उनके, जब देश पे नेता भारी है
किसी कल्पित उद्धारक...
बहुत सहा इस धरती ने, और बहुत दुःख भोगा
अपने अन्तः के 'राम' को ही, अब जगाना होगा,
हटो आधुनिकता के मेघ, हमें सादी भारतीयता प्यारी है
किसी कल्पित उद्धारक की तलाश अभी भी जारी है
