
दीवालों पर चिपके आइने,
छप्पर से छन कर आती रोशनी
मिट्टी की सोंधी खुशबू में,
यादों की लिपटी चाशनी
वो स्लेट , स्याही और कलम,
बेमतलब की यारी
तेल में सनी हुई बेतरतीब लटें,
उसपे मुस्कान प्यारी
सोचता हूँ ईश्वर भी व
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दीवालों पर चिपके आइने,
छप्पर से छन कर आती रोशनी
मिट्टी की सोंधी खुशबू में,
यादों की लिपटी चाशनी
वो स्लेट , स्याही और कलम,
बेमतलब की यारी
तेल में सनी हुई बेतरतीब लटें,
उसपे मुस्कान प्यारी
सोचता हूँ ईश्वर भी व