कठिन है बहुत, किन्तु कट रहा है 

जीवन सुख , दुःख में बंट रहा है

कहीं उत्सव है , प्रिय से मिलन का

कहीं दर्द आँखों में सिमट रहा है

घर कहीं है रौशन , नई चहक से

कहीं धड़कनों का स्वर , घट रहा है

नये स्वप्न भरे हैं, किसी के नैनो में

कहीं मंजिलों से ,मन उचट रहा है

वो एहसास , जिंदा रखना हमेशा

अंधेरा ग़म का , धीरे-धीरे छट रहा है