स्वप्न-सोपान हैं मेरे लिए, 

आप मेरा आकाश हैं

बाबूजी! आप कहीं भी हों , 

सदा हमारे पास हैं

जीवन पथ के अंधियारे में , 

ध्रुवतारा के जैसे

डगमग पग को संभालते , 

कोई सहारा हो जैसे

मंजिलों को पाने का साहस 

और मेरे प्रयास हैं

बाबूजी! आप कहीं भी हों 

सदा हमारे पास हैं


मेरे सर पर हाथ आपका, 

सब सम्भव कर देता है

थक कर हारे टूटे मन , 

नया साहस भर देता है

मेरे भाग्य-विधाता आप , 

स्वयं पर मेरा विश्वास हैं

बाबूजी! आप कहीं भी हों , 

सदा हमारे पास हैं