मैं जब सोचता हूँ तुम्हें

होंठ कसे रहते हैं

सांसे थम-सी जाती हैं सुनने को,

वो प्यारी बातें जो कभी,

सच न हो सकीं।

मैं जब सोचता हूँ तुम्हें...

आँखें अधमुंदी-सी देखती हैं,

अतीत के क्षणों को,

चलचित्र की तरह

मैं जब सोचता हूँ तुम्हें...

गर मरने के बाद भी,

आँखें मेरी खुली हों

तो तुम ये समझना,

मैं तुम्हें सोच रहा था और,

धड़कन भी रुक गई थी

इस असीम सुख के लिए

मैं जब सोचता हूँ तुम्हे...