
मैं जब सोचता हूँ तुम्हें
होंठ कसे रहते हैं
सांसे थम-सी जाती हैं सुनने को,
वो प्यारी बातें जो कभी,
सच न हो सकीं।
मैं जब सोचता हूँ तुम्हें...
आँखें अधमुंदी-सी देखती हैं,
अतीत के क्षणों को,
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मैं जब सोचता हूँ तुम्हें
होंठ कसे रहते हैं
सांसे थम-सी जाती हैं सुनने को,
वो प्यारी बातें जो कभी,
सच न हो सकीं।
मैं जब सोचता हूँ तुम्हें...
आँखें अधमुंदी-सी देखती हैं,
अतीत के क्षणों को,